
संक्रान्ति पुण्यकालोऽयं, दानं स्नानं जपस्तथा।
कृतानि देवदैवज्ञैः, कोटिगुणफलं लभेत् ॥
सौर नववर्ष की महाशक्तिशाली बेला ‘विषुवत संक्रान्ति’ (बैसाखी) इस वर्ष 14 अप्रैल 2026, दिन मंगलवार को प्रतिष्ठित हो रही है। सूर्य का मेष राशि में प्रवेश समस्त जगत के लिए अत्यंत प्रभावकारी होता है। ज्योतिषीय गणनानुसार, इस कालखंड में ग्रहों की विशेष स्थिति के कारण कुछ विशिष्ट राशियों और नक्षत्रों पर ‘अपैट’ एवं ‘वामपाद दोष’ का प्रभाव परिलक्षित हो रहा है। इन दोषों की शांति और वर्ष भर की शुभता सुनिश्चित करने हेतु शास्त्रोक्त उपाय एवं अनुष्ठान अनिवार्य हैं।
1. अपैट (चंद्र बल अशुद्धि) एवं परिहार
संवत्सर प्रतिपदा के दिन मेष, सिंह एवं धनु राशि तथा विषुवत संक्रान्ति (1 गते वैशाख) के दिन कर्क, वृश्चिक एवं मीन राशि के जातकों को ‘अपैट’ का दोष रहेगा।
शांति उपाय:– सूर्य संक्रान्ति पर रुद्राभिषेक एवं दुर्गा सप्तशती का पाठ परम कल्याणकारी है। अपने कुल पुरोहित के माध्यम से या किसी पवित्र शिव मंदिर में श्वेत वस्त्र, मोती, चांदी, चावल, दूध, दही, घृत एवं शंख का दान करें। चावल की खीर बनाकर जरूरतमंदों को प्रसाद स्वरूप वितरित करने से सात्विक एवं सकारात्मक फलों की प्राप्ति होगी।
2. वामपाद दोष एवं निवारण–
पूर्वाभाद्रपदा नक्षत्र, उत्तराभाद्रपदा नक्षत्र तथा रेवती नक्षत्र अर्थात कुंभ राशि में पूर्वाभाद्रपदा नक्षत्र तथा संपूर्ण मीन राशि में ‘वामपाद दोष’ का प्रभाव रहेगा, जिसके परिणामस्वरूप वर्ष भर शारीरिक कष्ट, व्यर्थ विवाद, अशांति एवं मानसिक तनाव की प्रबल संभावना बनी रहेगी।
शांति उपाय:– अरिष्टों के निदान हेतु रुद्राभिषेक एवं दुर्गा सप्तशती का अनुष्ठान/पाठ करें। दोष शांति हेतु चांदी का ‘वामपाद’ (बायां पैर) बनवाकर दान करें। साथ ही लाल वस्त्र (प्रथम पूज्य गणेश जी हेतु), श्वेत वस्त्र, चावल, दही, दूध, घी, मोती एवं दक्षिणा अपनी सामर्थ्यानुसार शिव मंदिर में अर्पित कर आचार्य को दान दें।
3. नक्षत्र जनित प्रतिकूलता एवं अनुष्ठान
रोहिणी, मृगशिरा, आर्द्रा नक्षत्र (बाएं हाथ में) तथा अश्विनी, भरणी तथा कृतिका नक्षत्र के जातकों के लिए संक्रान्ति का फल दाहिने पैर में होने के कारण प्रतिकूल रह सकता है, जिससे व्यर्थ भ्रमण, अधिक परिश्रम, शारीरिक कष्ट व धन हानि की आशंका रहेगी।
शांति उपाय–: इन नक्षत्रों से संबंधित सभी जातक शांति हेतु रुद्राभिषेक एवं दुर्गा सप्तशती का अनुष्ठान अवश्य करें, जिससे वर्ष में होने वाले कष्टों का निवारण हो सके।
(जिन जातकों का 14 अप्रैल को किन्हीं अपरिहार्य कारणों से उपाय न हो सके, वे आगामी पूर्णिमा तिथि पर इन उपायों को पूर्ण कर सकते हैं।)
ज्योतिषाचार्य डॉ. मंजू जोशी
वैदिक ज्योतिष एवं वास्तु विशेषज्ञ
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