फरवरी में बिजली महंगी, एफपीपीसीए बढ़ोतरी से उपभोक्ताओं पर एक वर्ष में 7वीं बार बढ़ा आर्थिक बोझ

Electricity Bill,

उत्तराखंड (Uttarakhand) की राजधानी देहरादून (Dehradun) से बिजली उपभोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण और सीधा असर डालने वाला समाचार सामने आया है। उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (Uttarakhand Power Corporation Limited–UPCL) ने फरवरी माह के लिए ईंधन एवं विद्युत क्रय लागत समायोजन (Fuel And Power Purchase Cost Adjustment–FPPCA) के अंतर्गत बिजली की नई बढ़ी हुई दरें जारी कर दी हैं.

बीते एक वर्ष में 7वीं बार हुई इस बढ़ोतरी के बाद राज्य के लाखों घरेलू, व्यावसायिक, औद्योगिक और कृषि उपभोक्ताओं को महंगे बिजली बिल का सामना करना पड़ेगा। फरवरी में लागू होने वाली यह वृद्धि मार्च माह में आने वाले बिजली बिलों में दिखाई देगी, जिससे आम परिवारों की मासिक बजट पर सीधा असर पड़ेगा।

ऊर्जा निगम की ओर से जारी नई दरों को यूपीसीएल के प्रबंध निदेशक अनिल कुमार (Anil Kumar) के अनुमोदन के बाद लागू किया गया है। निगम ने एफपीपीसीए के तहत चार पैसे से लेकर 15 पैसे प्रति यूनिट तक बिजली महंगी की है। यह वृद्धि ऐसे समय पर आई है, जब पहले से ही महंगाई, शिक्षा, स्वास्थ्य और परिवहन जैसे खर्चों से आमजन पर आर्थिक दबाव बना हुआ है।

जनवरी 2025 से जनवरी 2026 के बीच बिजली दरों में अस्थिरता बनी रही। इस एक वर्ष की अवधि में केवल तीन बार उपभोक्ताओं को थोड़ी राहत मिली, जबकि दस महीनों में बिजली की दरें बढ़ाई गईं। दिसंबर 2025 में एक से पांच पैसे, नवंबर में तीन से 14 पैसे और जुलाई में 24 से 100 पैसे प्रति यूनिट तक दरें घटाई गई थीं। इसके विपरीत जनवरी 2025 में चार से 12 पैसे, फरवरी में नौ से 28 पैसे, जून में 17 से 71 पैसे, अगस्त में पांच से 21 पैसे, सितंबर में आठ से 33 पैसे और अक्टूबर में छह से 26 पैसे प्रति यूनिट तक बढ़ोतरी की गई थी।

 

ऊर्जा निगम ने पहले दावा किया था कि मासिक समायोजन के चलते एक अप्रैल से लागू होने वाली वार्षिक दरों में अतिरिक्त बढ़ोतरी नहीं की जाएगी। इसके बावजूद एक अप्रैल 2025 से बिजली की वार्षिक दरों में 5.6 प्रतिशत की वृद्धि लागू कर दी गई, जिससे उपभोक्ताओं पर दोहरा आर्थिक भार पड़ा।

यूपीसीएल के अनुसार नई एफपीपीसीए दरों के तहत विभिन्न श्रेणियों में अलग-अलग बढ़ोतरी की गई है।

 

बीपीएल श्रेणी में 0.4 पैसे प्रति यूनिट

 

घरेलू उपभोक्ताओं पर 10 पैसे प्रति यूनिट

 

वाणिज्यिक श्रेणी में 14 पैसे प्रति यूनिट

 

सरकारी संस्थानों के लिए 13 पैसे प्रति यूनिट

 

निजी नलकूप पर 0.4 पैसे प्रति यूनिट

 

कृषि श्रेणी में 0.7 पैसे प्रति यूनिट

 

इसके अतिरिक्त उद्योगों के लिए 13 पैसे, मिश्रित लोड में 12 पैसे, रेलवे के लिए 12 पैसे, विद्युत वाहन चार्जिंग स्टेशनों पर 12 पैसे और अस्थायी कनेक्शनों पर सबसे अधिक 15 पैसे प्रति यूनिट की बढ़ोतरी की गई है।

यह वृद्धि केवल घरेलू उपभोक्ताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि उद्योग, कृषि और सेवा क्षेत्र पर भी इसका प्रभाव पड़ेगा। उद्योगों की लागत बढ़ने से वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में वृद्धि की आशंका है, जबकि कृषि क्षेत्र में बिजली महंगी होने से उत्पादन लागत बढ़ सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि बार-बार होने वाले एफपीपीसीए समायोजन से ऊर्जा नीति, नियमन और दीर्घकालिक योजना पर भी सवाल उठते हैं।

ऊर्जा निगम का कहना है कि यह वृद्धि ईंधन लागत और विद्युत क्रय मूल्य में बढ़ोतरी के कारण आवश्यक थी। हालांकि उपभोक्ताओं की अपेक्षा है कि पारदर्शिता, दीर्घकालिक स्थिरता और कमजोर वर्गों को राहत देने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं।

सम्बंधित खबरें