
उत्तराखंड में बिजली का करंट: मार्च से यूनिट दरों में 1.44 रुपये तक बढ़ोतरी, उद्योगों और आम उपभोक्ताओं में नाराजगी!
दर्पण न्यूज 24/7 ब्यूरो देहरादून। उत्तराखंड के बिजली उपभोक्ताओं के लिए मार्च का महीना महंगाई का नया झटका लेकर आया है। राज्य की बिजली वितरण कंपनी उत्तराखण्ड पावर कारपोरेशन (यूपीसीएल) ने ईंधन एवं बिजली खरीद लागत समायोजन (एफपीपीसीए) के तहत बिजली की दरों में 34 पैसे से लेकर 1.44 रुपये प्रति यूनिट तक बढ़ोतरी कर दी है। मुख्य अभियंता (वाणिज्य) एन.एस. बिष्ट द्वारा जारी आदेश के अनुसार नई दरें तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई हैं। इस फैसले से राज्य के घरेलू, व्यावसायिक और औद्योगिक समेत लाखों उपभोक्ता प्रभावित होंगे।
उद्योग और कारोबार पर सबसे बड़ा असर
नई दरों का सबसे अधिक असर व्यावसायिक और औद्योगिक प्रतिष्ठानों पर पड़ा है।
व्यावसायिक श्रेणी के उपभोक्ताओं के लिए बिजली 1.34 रुपये प्रति यूनिट महंगी कर दी गई है।
औद्योगिक इकाइयों के लिए दरों में 1.24 रुपये प्रति यूनिट की वृद्धि की गई है।
अस्थायी कनेक्शन लेने वाले उपभोक्ताओं को सबसे बड़ा झटका लगा है, जिनके लिए 1.44 रुपये प्रति यूनिट अतिरिक्त शुल्क लगाया गया है।
वहीं गरीब परिवारों को भी राहत नहीं मिली है। गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) श्रेणी के उपभोक्ताओं के लिए भी बिजली 34 पैसे प्रति यूनिट महंगी कर दी गई है।
उद्योग जगत में नाराजगी
बिजली दरों में लगातार बढ़ोतरी को लेकर उद्योग जगत ने विरोध शुरू कर दिया है। स्टील निर्माता संघ के उपाध्यक्ष पवन अग्रवाल का कहना है कि हर महीने बिजली दरें बढ़ाना उद्योगों को हतोत्साहित करने वाला कदम है। उनका तर्क है कि जब सालाना दरों में वृद्धि पहले ही की जाती है, तो हर महीने अतिरिक्त बढ़ोतरी का कोई औचित्य नहीं बनता।
उद्योगों का कहना है कि बढ़ते बिजली बिलों से उत्पादन लागत बढ़ रही है, जिससे बाजार में प्रतिस्पर्धा करना कठिन हो रहा है।
क्यों बढ़ रही हैं बिजली की दरें
ऊर्जा निगम के अधिकारियों का कहना है कि बिजली खरीद की लागत में लगातार उतार-चढ़ाव होता रहता है। इसी कारण ईंधन अधिभार समायोजन के माध्यम से हर महीने दरों में बदलाव करना पड़ता है। हालांकि आम उपभोक्ताओं और व्यापारियों में इस फैसले को लेकर भारी असंतोष देखा जा रहा है।
उधर अप्रैल में वार्षिक बिजली दरों में संभावित बढ़ोतरी की चर्चा के बीच उपभोक्ताओं की चिंता और बढ़ गई है।
उपभोक्ता श्रेणी के अनुसार बढ़ोतरी (रुपये प्रति यूनिट)
घरेलू उपभोक्ता: 0.93
व्यावसायिक प्रतिष्ठान: 1.34
औद्योगिक इकाइयां: 1.24
सरकारी संस्थान: 1.27
कृषि उपभोक्ता: 0.67
बीपीएल परिवार: 0.34
अब देखना यह होगा कि बढ़ती बिजली दरों को लेकर सरकार और ऊर्जा निगम उपभोक्ताओं को कोई राहत देते हैं या नहीं, क्योंकि महंगी बिजली का असर सीधे घर के बजट से लेकर उद्योगों की उत्पादन लागत तक पड़ने वाला है।









