
काशीपुर के किसान सुखवंत सिंह आत्महत्या प्रकरण में आईटीआई थाने के थानाध्यक्ष कुंदन सिंह व तीन दरोगा और 8 पुलिस कर्मियों को निलंबित करने के बाद कुमाऊं से गढ़वाल रेंज में तबादला कर दिया गया है। इस संबंध में गुरुवार को पुलिस महानिरीक्षक की ओर से तबादला सूची जारी की गई है। वहीं आज 15 जनवरी को हल्द्वानी में कुमाऊं कमिश्नर के सामने थानाध्यक्ष रौतेला समेत चार अधिकारियों ने बयान दर्ज कराए हैं।
काशीपुर निवासी किसान सुखवंत सिंह की आत्महत्या से जुड़े मामले में पुलिस मुख्यालय ने बड़ा कदम उठाया है। किसान द्वारा आत्महत्या से पहले पुलिस पर लगाए गए गंभीर आरोपों को देखते हुए मामले की नई उच्चस्तरीय एसआईटी (विशेष जांच टीम) का गठन किया गया है। इस पांच सदस्यीय एसआईटी की अध्यक्षता आईजी एसटीएफ करेंगे।
नई एसआईटी में पुलिस अधीक्षक चम्पावत अजय गणपति, क्षेत्राधिकारी टनकपुर वंदना वर्मा, निरीक्षक दीवान सिंह बिष्ट (जनपद चम्पावत) और उपनिरीक्षक मनीष खत्री (जनपद चम्पावत) को शामिल किया गया है। एसआईटी को पूरे मामले की निष्पक्ष, स्वतंत्र और गहन जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
26 नामजदों पर पहले से मुकदमा दर्ज
गौरतलब है कि सुखवंत सिंह को आत्महत्या के लिए उकसाने समेत अन्य गंभीर धाराओं में कोतवाली आईटीआई काशीपुर में पहले ही 26 नामजद आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जा चुका है। यह कार्रवाई मृतक के परिजनों की तहरीर पर की गई थी।
पहले भी गठित हुई थी एसआईटी
इससे पहले मामले की जांच के लिए एक एसआईटी का गठन किया गया था, जिसकी अगुवाई एसपी अपराध एवं यातायात नीहारिका तोमर कर रही थीं। उस जांच टीम में आईटीआई थाना, काशीपुर, कुंडा और एसओजी से जुड़े कई अधिकारी शामिल थे। हालांकि अब जांच की संवेदनशीलता और गंभीरता को देखते हुए नई उच्चस्तरीय एसआईटी गठित की गई है।
12 पुलिसकर्मियों का गढ़वाल रेंज में ट्रांसफर
मामले से जुड़े जिन 12 पुलिसकर्मियों को पहले लाइनहाजिर या निलंबित किया गया था, उन्हें अब कुमाऊं रेंज से गढ़वाल रेंज में ट्रांसफर कर दिया गया है।
इनमें चमोली और रुद्रप्रयाग जनपदों में भेजे गए उपनिरीक्षक, अपर उपनिरीक्षक, मुख्य आरक्षी और आरक्षी शामिल हैं। यह कदम जांच को प्रभावित होने से बचाने और पारदर्शिता बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया गया है।
किसान आत्महत्या प्रकरण ने प्रदेश में कानून-व्यवस्था और पुलिस कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। नई एसआईटी के गठन और बड़े पैमाने पर ट्रांसफर को सरकार और पुलिस प्रशासन की सख्ती के रूप में देखा जा रहा है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच से पीड़ित परिवार को न्याय और मामले की सच्चाई सामने आ सके।








