
सांस्कृतिक रंगयात्रा के = साथ सात दिवसीय उत्तरायणी कौतिक – मेले का आगाज हो गया। नगर में निकली रंगयात्रा से पूरा नगर क्षेत्र कुमाउंनी संस्कृति से सराबोर हो गया। रंगयात्रा में छोलिया नृत्य आकर्षक का केंद्र रहा। कुमाऊं सांस्कृतिक उत्थान समिति के तत्वावधान में शुक्रवार को तराई बीज विकास निगम के मैदान से ईष्टदेव गोलज्यू की अगुवाई में शोभायात्रा के साथ रंगयात्रा शुरू हुई। रंगयात्रा डिग्री कॉलेज रोड होते हुए नगर के विभिन्न प्रमुख मार्गो से तराई बीज मैदान में पहुंची। रंगयात्रा में क्षेत्र के विभिन्न विद्यालयों के छात्र-छात्राओं, पंखुडी थारू सांस्कृतिक समिति, महिलाओं की कलश यात्रा, विभिन्न छोलिया टीमों ने प्रतिभाग किया। रंगयात्रा के दौरान विभिन्न सांस्कृतिक झांकियों से सजी रंगयात्रा नगर में आकर्षक का केन्द्र रही। रंगयात्रा के कंजाबाग रोड स्थित बीज निगम मैदान पर पहुंचने पर सात दिवसीय मेले का शुभारंभ दीप प्रज्वलन से हुआ। समिति अध्यक्ष
कैप्टन खाती ने कहा कि मेले हमारी संस्कृति के धरोहर हैं। इस प्रकार के आयोजन आपस में एक दूसरे को जोड़ने का काम करते हैं। मेले के प्रथम दिन विभिन्न विद्यालय के बच्चों ने वंदना, स्वागत गीत, कुमाउंनी नृत्य, कुमाउंनी लोकगीत तथा विभिन्न सांस्कृतिक टीमों ने
रंगयात्रा में गोल्ज्यू देवता की झांकी व छोलिया नृत्य दिखाती छोलिया टीम
लोकगीत व कलाकारों ने छोलिया नृत्य प्रस्तुत कर लोगों को मंत्रमुग्ध किया। कुमाउंनी गायक कलाकार जितेंद्र तोमक्याल व सुंदर सिंह कफलिया ने अपने गीतों से से लोगों लोगों को थिरकने को मजबूर कर दिया। पंखुडी थारू सांस्कृतिक समिति ने भी रंगारंग
कार्यक्रम प्रस्तुत कर समां बांधा। कार्यक्रम का संचालन भुवन भट्ट ने किया। इस दौरान मेला प्रभारी केडी भट्ट, बीएस मेहता, जेएस बसेड़ा, जगदीश चंद्र पांडेय, कैलाश मनराल, गोपाल दत्त पाठक, नवीन कापड़ी, घनश्याम सनवाल, मनोज कन्याल,
सुधीर वर्मा, किशन सिंह किन्ना, प्रकाश तिवारी, केबी चंद, गणेश लोहनी, वीरेन्दर सिंह, फकीर सिंह ज्याला सावित्री चंद, दया भट्ट, भागीरथी कापड़ी, प्रेमा महर, राकेश कापड़ी, शंकर लोहनी, भागीरथी चंद आदि मौजूद थे।









