
देहरादून में बिन्दुखत्ता समेत प्रदेश के विभिन्न खत्तों, गोठों, टांगिया गांवों और इन्दिरा ग्राम–गांधी ग्रामों को राजस्व ग्राम का दर्जा देने की मांग ने अब राजनीतिक और जनांदोलन का रूप ले लिया है। इंडिया गठबंधन ने ऐलान किया है कि 25 फरवरी को देहरादून के गांधी पार्क में इस मुद्दे पर एक विशाल धरना-प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा। गठबंधन का कहना है कि वर्षों से इन क्षेत्रों में रह रहे लोगों को अब तक मूलभूत अधिकारों से वंचित रखा गया है, जिसे लेकर जनता में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित संयुक्त प्रेस वार्ता के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि बिन्दुखत्ता, बापूग्राम, पुछड़ी, बागजाला और बग्गा चौवन जैसे क्षेत्रों को शीघ्र राजस्व ग्राम घोषित किया जाना चाहिए। उन्होंने याद दिलाया कि 26 दिसंबर 2016 को तत्कालीन कांग्रेस सरकार की मंत्रिमंडल बैठक में इस संबंध में निर्णय लिया गया था, जिसकी भावना के अनुरूप पात्र निवासियों को भूमिधरी अधिकार प्रदान किए जाने चाहिए। उनका कहना था कि लंबे समय से बसे लोगों को कानूनी मान्यता मिलना उनका अधिकार है।
नेताओं ने टिहरी डैम विस्थापितों, वन क्षेत्रों से विस्थापित वन गुज्जरों और पीढ़ियों से सरकारी भूमि पर रह रहे परिवारों को भूमि का स्वामित्व देने की मांग भी दोहराई। साथ ही अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के उन परिवारों को नियमित करने की बात कही गई, जो वर्षों से ग्राम समाज या सरकारी जमीन पर निवास कर रहे हैं।
समाजवादी पार्टी के नेता डॉ. एस.एन. सचान ने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार कमजोर वर्गों की अनदेखी कर रही है और पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने में लगी है। भाकपा के पूर्व राष्ट्रीय परिषद सदस्य समर भंडारी ने कहा कि सरकार की नीतियां आम जनता को हटाकर कॉरपोरेट घरानों को फायदा पहुंचाने की दिशा में काम कर रही हैं। भाकपा (माले) के राज्य सचिव इन्द्रेश मैखूरी ने आरोप लगाया कि न्यायालय के आदेशों की गलत व्याख्या कर बिन्दुखत्ता और बापूग्राम के लोगों में भय का माहौल बनाया जा रहा है।
माकपा नेता सुरेन्द्र सजवाण ने एलिवेटेड रोड परियोजनाओं के नाम पर मलिन बस्तियों को उजाड़ने का आरोप लगाया, जबकि जगदीश कुकरेती ने कहा कि पर्यटन परियोजनाओं के बहाने आदिवासी समुदायों को विस्थापित किया जा रहा है। नेताओं का कहना है कि टांगिया और वन क्षेत्रों में रहने वाले हजारों लोग आज भी बुनियादी सुविधाओं और नागरिक अधिकारों से वंचित हैं।
इंडिया गठबंधन ने स्पष्ट किया है कि यदि सरकार ने जल्द सकारात्मक कदम नहीं उठाए, तो आंदोलन को पूरे प्रदेश में व्यापक रूप दिया जाएगा।









