
*संकष्टी चतुर्थी 2026: संतति की दीर्घायु व सर्व-बाधा मुक्ति का महा-पर्व*
(मुहूर्त, विधि व कथा)
सभी सनातनीय पाठकों एवं धर्मावलंबियों को सादर नमस्कारम, प्रणाम, जय श्री गणेश, जय माता दी 🙏
*विनायकं ज्ञानधनं गणेशं प्रसिद्धमृद्धिप्रदमन्तरायम्।*
*तमीशपुत्रं शुभदं प्रसन्नं,विघ्नेश्वरं नौमि हरस्य पुत्रम्॥*
अवगत कराना चाहूंगी कि भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की संकष्टी चतुर्थी का पावन पर्व 31 अगस्त 2026, दिन सोमवार को रखा जाएगा।
संकष्टी चतुर्थी का सनातन धर्म में विशेष महत्व है। इस दिन भगवान गणेश जी की विशेष पूजा-अर्चना का विधान है। संकट चतुर्थी को माताएं अपनी संतति की दीर्घ जीवन व खुशहाली की कामना हेतु निर्जला उपवास रखती हैं।
*मुहूर्त*
चतुर्थी तिथि प्रारंभ: 31 अगस्त 2026, प्रातः 08:53 बजे से 01 सितंबर 2026, प्रातः 07:44 तक।
*पूजा हेतु शुभ मुहूर्त:* प्रातः 09:10 से 10:46 तक
चंद्रोदय समय (अर्घ्य काल): रात्रि 08:25 से । (चंद्रोदय का स्थानीय समय भिन्न हो सकता है)
*पूजा विधि*
नित्य कर्म से निवृत्त होकर स्नाननादि करने के उपरांत उपवास का संकल्प लें। गणेशजी की प्रतिमा को ईशान कोण में एक चौकी पर स्थापित करें। चौकी पर लाल वस्त्र बिछाए। गणेशजी को गंगाजल से स्नान कराएं। लाल वस्त्र अर्पित करें गणेश जी का श्रंगार करें। रोली, कुमकुम, अक्षत, लाल पुष्प 108 दूर्वा अर्पित करें। पान, सुपारी और लड्डू व 11 मोदक का भोग लगाएं। धूप व घी का दीपक जलाएं। गणेश जी की आरती उतारें।
और गणेशजी के इन मंत्रों का पाठ करें जिससे आपके जीवन की सभी बाधांए/परेशानियां समाप्त होंगी, तथा जीवन में शुभता का आगमन होगा–
*मंत्र*
ॐ गं गणपतये नमः
ॐ श्री सिद्धि विनायकाय नमः
गणपति अथर्वशीर्ष का पाठ करें।
*चंद्र पूजन*
पूरे दिन उपवास रखने के उपरांत संध्या काल में चंद्रदेव को शहद, रोली, मिश्रित दूध से चांदी या स्टील के पात्र से अर्घ्य दें। चंद्रदेव को रोली, कुमकुम, अक्षत, पुष्प धूप, दीप, नैवेद्य अर्पित करें। गणेश जी को तिल के लड्डू एवं मोदक अर्पित करें। ग्यारह घी की बत्ती जलाकर आरती करें। प्रसाद ग्रहण कर उपवास का पारण करें।
*कथा–*
एक बार मां पार्वती स्नान हेतु गईं उन्होंने दरबार पर गणेश जी को खड़ा कर दिया और किसी को भीतर ना आने देने का आदेश दिया। जब भगवान भोलेनाथ आए तो गणपति ने उन्हें अंदर आने से रोक दिया। भगवान शिव क्रोधित हो गए और उन्होंने अपने त्रिशूल से गणेशजी का सिर धड़ से अलग कर दिया।
पुत्र का यह हाल देख मां पार्वती विलाप करने लगीं और अपने पुत्र को जीवित करने की हठ करने लगीं। जब मां पार्वती ने शिव से बहुत अनुरोध किया तो भगवान गणेश को हाथी का सिर लगाकर दूसरा जीवन दिया गया और गणेशजी को गजानन कहा जाने लगा। संकट चौथ के दिन ही भगवान गणेश को 33 कोटी देवी-देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त हुआ। इस दिन से भगवान गणपति को प्रथम पूज्य होने का वरदान भी प्राप्त हुआ।
*ज्योतिषाचार्य डॉ. मंजू जोशी*
*वैदिक ज्योतिष एवं वास्तु विशेषज्ञ*
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