आईजी कुमाऊं की अपराध गोष्ठी में अपराध नियंत्रण और पुलिसिंग की गुणवत्ता पर जोर

उत्तराखंड पुलिस,

हल्द्वानी, 18 अगस्त। पुलिस महानिरीक्षक कुमाऊं परिक्षेत्र श्रीमती निवेदिता कुकरेती ने मंगलवार को परिक्षेत्र के जनपद प्रभारियों के साथ मासिक अपराध गोष्ठी कर अपराध एवं कानून-व्यवस्था की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने लंबित मामलों के शीघ्र निस्तारण, नवीन आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन और तकनीक आधारित पुलिसिंग को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए।

 

गोष्ठी में नैनीताल के एसएसपी डॉ. मंजूनाथ टीसी, ऊधमसिंहनगर के एसएसपी अजय गणपति, अल्मोड़ा के एसएसपी चन्द्रशेखर घोडके, पिथौरागढ़ के एसपी अक्षण प्रहलाद कोंडे, चम्पावत की एसपी रेखा यादव और बागेश्वर के एसपी जितेन्द्र मेहरा मौजूद रहे।

 

गोष्ठी में 46 बिंदुओं पर जनपदवार कार्रवाई की समीक्षा की गई। नवीन आपराधिक कानूनों और ICJS के तहत 60/90 दिन की समयसीमा में आरोपपत्र अथवा अंतिम रिपोर्ट दाखिल करने, e-Sakshya, Zero FIR और e-Summon के इस्तेमाल की स्थिति भी परखी गई। आईजी ने इन व्यवस्थाओं का शत-प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

 

सात माह में 25.66 करोड़ रुपये के मादक पदार्थ बरामद

 

1 जनवरी से 31 जुलाई 2026 तक कुमाऊं परिक्षेत्र में NDPS Act के तहत 382 मुकदमे दर्ज कर 519 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इनमें वाणिज्यिक मात्रा से जुड़े 32 मामलों में 55 गिरफ्तारियां शामिल हैं। 12 आरोपियों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत भी कार्रवाई की गई।

 

पुलिस ने इस अवधि में 45 किलो चरस, 7.338 किलो स्मैक/ब्राउन शुगर/हेरोइन, 1,050.700 किलो गांजा, 4.6 किलो अफीम, 36.8 किलो डोडा, 40,257 नशीली गोलियां-कैप्सूल और 1,791 नशीले इंजेक्शन बरामद किए। बरामद मादक पदार्थों की अनुमानित कीमत 25 करोड़ 66 लाख 71 हजार 407 रुपये बताई गई है।

 

आईजी ने नशे की सप्लाई चेन को चिन्हित कर तस्करों के खिलाफ कठोर कार्रवाई तथा वित्तीय और गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई तेज करने के निर्देश दिए।

 

गंभीर अपराधों के खुलासे में बेहतर प्रदर्शन

 

सात माह में कुमाऊं परिक्षेत्र में लूट के 94 प्रतिशत, डकैती के 100 प्रतिशत, चोरी के 76 प्रतिशत, हत्या के 96 प्रतिशत, बलात्कार के 100 प्रतिशत, वाहन लूट के 100 प्रतिशत, चैन स्नैचिंग के 79 प्रतिशत, महिला अपहरण के 96 प्रतिशत और दहेज हत्या के 93 प्रतिशत मामलों का खुलासा किया गया।

 

आईजी ने लंबित गंभीर अपराधों के शीघ्र खुलासे के लिए वरिष्ठ अधिकारियों को व्यक्तिगत पर्यवेक्षण के निर्देश दिए।

 

1,051 गुमशुदा बरामद

 

गुमशुदा व्यक्तियों की बरामदगी में भी पुलिस ने कार्रवाई की। इस अवधि में 12 वर्ष से कम आयु के 10, 12 से 18 वर्ष आयु वर्ग के 210 बालक-बालिकाओं, 299 पुरुषों और 532 महिलाओं समेत कुल 1,051 गुमशुदा व्यक्तियों को बरामद किया गया।

 

1,048 शिकायतों में 905 का निस्तारण

 

परिक्षेत्रीय शिकायत प्रकोष्ठ को सात माह में कुल 1,048 शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें से 905 का निस्तारण किया गया। आईजी ने लंबित शिकायतों की नियमित समीक्षा कर शिकायतकर्ताओं को समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण समाधान उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

 

गोष्ठी में साइबर अपराध, CCTNS, NCRP, Secure Malkhana Portal, Hotspot Analysis, e-Zero FIR, CM Helpline, e-Beat सहित विभिन्न तकनीकी व्यवस्थाओं की भी समीक्षा हुई। महिला, बच्चों, पॉक्सो तथा एससी/एसटी एक्ट से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता और प्राथमिकता के साथ कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।

 

आईजी निवेदिता कुकरेती ने सभी जनपद प्रभारियों से कहा कि अपराध नियंत्रण, लंबित विवेचनाओं और शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण तथा नवीन आपराधिक कानूनों का प्रभावी क्रियान्वयन सर्वोच्च प्राथमिकता हो। उन्होंने कहा कि पुलिसिंग में जवाबदेही, पारदर्शिता और तकनीक के प्रभावी इस्तेमाल के माध्यम से आमजन को त्वरित एवं गुणवत्तापूर्ण पुलिस सेवाएं उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जाए।

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