
चंपावत के टनकपुर और बनबसा में 150 करोड़ की लागत से अत्याधुनिक 220 केवी जीआईएस विद्युत उपकेंद्र का निर्माण जारी है। सीएम धामी ने 3 करोड़ की अतिरिक्त राशि दी।
चंपावत। जिले के सीमांत क्षेत्रों के लिए एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। टनकपुर और बनबसा क्षेत्र में लंबे समय से चली आ रही बिजली समस्याओं का अब जल्द ही अंत होने वाला है। यहाँ बनबसा में 220/33 केवी जीआईएस (गैस इंसुलेटेड सबस्टेशन) विद्युत उपकेंद्र का निर्माण कार्य युद्धस्तर पर किया जा रहा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की विशेष घोषणा के तहत इस महत्वपूर्ण परियोजना के लिए सरकार ने तीन करोड़ रुपये की अतिरिक्त धनराशि भी जारी कर दी है।
यह अत्याधुनिक उपकेंद्र करीब 150 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से तैयार किया जा रहा है। इस आधुनिक ग्रिड के पूरी तरह चालू होने से टनकपुर-बनबसा और आसपास के सीमांत क्षेत्रों की बिजली व्यवस्था में क्रांतिकारी सुधार आएगा। स्थानीय निवासियों को पिछले कई वर्षों से परेशान करने वाली लो वोल्टेज, ओवरलोडिंग और अघोषित बिजली कटौती जैसी गंभीर समस्याओं से हमेशा के लिए परमानेंट राहत मिल जाएगी। अधिकारियों के मुताबिक यह नया प्लांट पूरी तरह स्थिर और गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करेगा।
भौगोलिक और सामरिक दृष्टि से बेहद संवेदनशील सीमा क्षेत्र में स्थित होने के कारण इस बिजली परियोजना को सुरक्षा के लिहाज से भी काफी अहम माना जा रहा है। इस उपकेंद्र के सक्रिय होते ही भारत-नेपाल बॉर्डर पर तैनात सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) और सेना की विभिन्न इकाइयों को 24 घंटे निर्बाध बिजली की सप्लाई मिल सकेगी। इससे सीमांत इलाकों की सुरक्षा व्यवस्थाएं पहले से कहीं अधिक चाक-चौबंद और मजबूत हो जाएंगी।
बनबसा में चल रहे इस भारी निर्माण कार्य की रफ्तार काफी तेज है और अब तक इसका लगभग 25 प्रतिशत काम सफलतापूर्वक पूरा किया जा चुका है। परियोजना को समय पर पूरा करने के लिए जरूरी अत्याधुनिक उपकरणों की आपूर्ति भी सुनिश्चित कर ली गई है। इसके अलावा वन भूमि हस्तांतरण प्रक्रिया को सुचारू रूप से पूरा करने के लिए पिटकुल (PITCUL) ने वन विभाग के खाते में छह करोड़ रुपये से अधिक की राशि पहले ही जमा करा दी है।
यह नया उपकेंद्र 220 केवी टनकपुर-सीबी गंज लाइन के जरिए सीधे मुख्य ग्रिड से जोड़ा जाएगा, जिस पर तेजी से काम चल रहा है। इस बड़ी बिजली परियोजना के धरातल पर उतरने के बाद न सिर्फ स्थानीय लोगों के घरों को रोशनी मिलेगी, बल्कि सीमांत क्षेत्र में औद्योगिक विकास की नई राहें भी खुलेंगी। उद्योग धंधे बढ़ने से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के बेहतरीन नए अवसर पैदा होंगे।









