
कॉर्बेट से सटे मोहान इको सफारी जोन को बिना पूर्व सूचना बंद किए जाने के विरोध में स्थानीय लोगों और पर्यटन व्यवसाय से जुड़े लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। नेचर गाइड, जिप्सी चालक और ग्रामीणों ने एकजुट होकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया और जोन को तत्काल पुनः संचालित करने की मांग उठाई।
अल्मोड़ा जिले के मोहान क्षेत्र में सोमवार को बड़ी संख्या में पर्यटन व्यवसायियों ने एकत्र होकर वन विभाग के फैसले का विरोध किया। प्रदर्शनकारियों ने वन दरोगा विनोद कुमार के माध्यम से मुख्यमंत्री और डीएफओ अल्मोड़ा दीपक सिंह को ज्ञापन भेजा। उनका कहना है कि बिना किसी पूर्व सूचना के जोन बंद करने का निर्णय न केवल अव्यावहारिक है, बल्कि इससे सैकड़ों परिवारों की आजीविका पर सीधा संकट खड़ा हो गया है।
जिप्सी व्यवसाय से जुड़े त्रिलोक रावत ने कहा कि करीब 300 से अधिक परिवार प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से इस सफारी जोन पर निर्भर हैं। ऐसे में अचानक बंदी से उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। उन्होंने इसे संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और आजीविका के अधिकार का उल्लंघन बताया।
प्रदर्शनकारियों ने हाल ही में हुई बाघ हमलों की घटनाओं पर शोक जताते हुए कहा कि बिना वैज्ञानिक विश्लेषण के जोन बंद करना समस्या का समाधान नहीं है। उन्होंने इसके पीछे कई कारण गिनाए, जिनमें भारी मशीनों से पेड़ों का कटान, ध्वनि प्रदूषण, जंगलों में आगजनी, सीमित क्षेत्र में बाघों की बढ़ती संख्या और जल स्रोतों की कमी शामिल हैं।
उनका कहना है कि इन कारणों से वन्यजीव अपने प्राकृतिक आवास से बाहर निकलकर आबादी वाले क्षेत्रों की ओर बढ़ रहे हैं, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष बढ़ रहा है। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में सोलर फेंसिंग, आपातकालीन मार्ग, ड्रोन निगरानी और जीपीएस गश्त जैसी व्यवस्थाओं की कमी भी सामने आई है।
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि मोहान इको सफारी जोन को जल्द नहीं खोला गया, तो पर्यटन व्यवस्था पर गंभीर असर पड़ेगा। अनुमान के अनुसार, इस बंदी से हर साल करीब 2.5 से 3 करोड़ रुपये के सरकारी राजस्व और 5 से 6 करोड़ रुपये के स्थानीय कारोबार को नुकसान हो सकता है।
प्रदर्शनकारियों ने सरकार से मोहान इको सफारी जोन को शीघ्र पुनः शुरू करने, वन्यजीव प्रबंधन के वैज्ञानिक उपाय अपनाने और स्थानीय लोगों की आजीविका सुरक्षित करने की मांग की है।








